उत्तराखंड- उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में आज एक भयावह प्राकृतिक आपदा घटित हुई, जिसने पूरे राज्य और देश को झकझोर कर रख दिया है। उत्तरकाशी के धराली गांव के पास बादल फटने की घटना में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 50 से 60 लोग लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद गांव का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट चुका है और पूरा इलाका मलबे, पत्थरों और तेज बहाव वाले पानी से भर गया है।
कैसे हुआ हादसा?
उत्तरकाशी जिले के गंगोत्री हाईवे पर स्थित हर्षिल के ऊपर पहाड़ी क्षेत्र में बादल फटा। बादल फटने की वजह से भारी मात्रा में मलबा और पानी नीचे धराली गांव की ओर बह गया। यह गांव गंगोत्री धाम से कुछ किलोमीटर पहले स्थित है और चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक विश्राम स्थल के रूप में जाना जाता है।
बादल फटने की वजह से खीर गंगा नदी का जलस्तर अचानक कई फीट तक बढ़ गया, जिससे पूरे गांव में तबाही मच गई। घर, दुकानें, वाहन और जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
4 मौतों की पुष्टि, दर्जनों लापता
उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि अब तक चार शव मलबे से निकाले जा चुके हैं। इसके अलावा लगभग 12 लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं, जबकि 50 से 60 लोगों के लापता होने की सूचना है। प्रशासन का कहना है कि यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
सेना, NDRF और SDRF मौके पर
चूंकि हर्षिल क्षेत्र में भारतीय सेना की टुकड़ी पहले से ही तैनात थी, इसलिए सेना के जवान 10 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंच गए। सेना के 150 जवान, NDRF की 4 टीमें, SDRF, पुलिस बल और स्थानीय स्वयंसेवक राहत और बचाव कार्य में लगे हुए हैं।
हेलीकॉप्टर से भी राहत सामग्री और मेडिकल सहायता पहुंचाई जा रही है। लेकिन खराब मौसम और टूटे हुए मार्गों की वजह से राहत कार्यों में बाधाएं आ रही हैं।
गंगोत्री हाईवे और यमुनोत्री मार्ग बाधित
आपदा के चलते गंगोत्री धाम का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट गया है। वहीं, यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग भी कई स्थानों पर अवरुद्ध हो गया है। चारधाम यात्रा फिलहाल रोक दी गई है और यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका गया है। प्रशासन ने सभी तीर्थयात्रियों से संयम बरतने और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया शोक
उत्तरकाशी की इस आपदा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री धामी ने आपदा की जानकारी गृह मंत्री को दी और केंद्र सरकार से राहत के लिए सहयोग मांगा। गृह मंत्रालय ने तत्काल सहायता का आश्वासन दिया है और कहा है कि जरूरत पड़ी तो अतिरिक्त टीमों को भी भेजा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा,
“उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में बादल फटने की खबर अत्यंत दुखद है। राहत व बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। प्रभावित परिवारों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं।”
क्यों होता है बादल फटना?
बादल फटने (Cloudburst) की घटना तब होती है जब किसी खास इलाके में बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश होती है, जिससे जमीन उसका पानी सोख नहीं पाती और तेज बहाव के रूप में पानी नीचे की ओर बह जाता है। हिमालयी क्षेत्र जैसे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में ऐसी घटनाएं अक्सर होती हैं, विशेषकर मानसून के दौरान।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि
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जलवायु परिवर्तन
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वनों की कटाई
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अनियंत्रित निर्माण
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और बदलता जलचक्र
इन घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता को बढ़ा रहा है।
पहले भी आ चुकी हैं ऐसी आपदाएं
उत्तराखंड में यह कोई पहली घटना नहीं है।
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साल 2013 में केदारनाथ आपदा ने देश को दहला दिया था।
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साल 2021 में मांडो गांव में
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और 2022 में देहरादून, टिहरी और पौड़ी में भी बादल फटने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
सरकार और प्रशासन द्वारा इन क्षेत्रों में अलर्ट जारी किए जाते हैं, लेकिन मौसम की तीव्रता को रोक पाना संभव नहीं होता।
मौसम विभाग की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पहले ही उत्तराखंड के कई जिलों में भारी बारिश और बादल फटने जैसी घटनाओं की चेतावनी जारी की थी। उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए थे।
IMD ने स्थानीय प्रशासन को सलाह दी थी कि नदियों और नालों के पास किसी को भी जाने से रोका जाए। हालांकि, कई बार इन चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया जाता या समय पर आवश्यक कदम नहीं उठाए जा पाते।
सरकार की ओर से राहत की घोषणाएं
उत्तराखंड सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख की सहायता राशि देने का ऐलान किया है। साथ ही घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। केंद्र सरकार ने भी हरसंभव मदद देने का भरोसा जताया है।
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी नहीं करने का निर्देश दिया है और खुद पूरे हालात पर नजर बनाए हुए हैं।